Prerak Prasang Book

A short hindi story with moral - छोटी नैतिक कहानी

Short Moral Story - दोहरा मापदंड


सूफी बहाउद्दीन अपने पास आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को नेक कमाई करने और किसी के साथ धोखाधड़ी न करने का उपदेश दिया करते थे। वह कहा करते थे, कि "किसी भी गरीब को देखकर उस पर क्रोध नहीं करना चाहिए । उस पर दया-भावना दिखानी चाहिए। लेकिन चापलूसी नहीं दिखानी चाहिए।"

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उसी नगर का एक अमीर व्यक्ति समय-समय पर सूफी के पास आया करता था। वह उनके पैरों पर सिर रख कर कहा करता- "आप तो सूरज हैं इस जमीन पर। आपके तेज से मेरे तमाम गुनाह जल कर राख हो गए हैं। आपके उपदेशों ने मेरा जीवन बदल दिया है। अपनी इबादत में आप मेरे लिए भी खुदा से प्रार्थना कर दिया कीजिए।"

सूफी बहाउद्दीन उसका मुख देखते ही उसकी असलियत समझ जाते। उसके मुख से प्रशंसा सुनते ही हँसने लगते। एक दिन जब वह अमीर चला गया, तो एक शिष्य ने सूफी से पूछा- "वह अमीर व्यक्ति आपको सूरज बताता है, प्रशंसा करता है। लेकिन, आप हंसकर उसकी उपेक्षा क्यों कर देते हैं ?"

सूफी ने शिष्य का हाथ पकड़कर कहा- "चलो मेरे साथ।" उन्होंने अपनी टोपी बदल ली, वेश बदल लिया और वे अमीर की दुकान पर पहुँच कर एक ओर खड़े हो गए। उसी समय एक गरीब उस अमीर से भिक्षा माँगने आया अमीर ने उसे गालियाँ देकर भगा दिया उन्होंने सामान खरीदा। अमीर ने मनमाने कई गुने पैसे झटक लिए। लौटते समय सूफी बहाउद्दीन अपने शिष्य से बोले- "आँखों से देख लिया न, इस अमीर के दोहरे चेहरे को ! कैसी आँखें दिखा रहा था गरीबों को यदि मैं सूरज होता, तो क्या वह उसकी गरमी का अनुभव नहीं करता?"


"दुर्वल चरित्र का व्यक्ति उस सरकंडे जैसा है, जो हवा के हर झोंके पर झुक जाता है।"

- महाकवि माघ

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