Suryakant Tripathi Nirala - सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की प्रेरणादायक कहानी

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, Suryakant Tripathi Nirala, निरुपमा सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला,  सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की भाषा शैली,  सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के पुरस्कार,  सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की छोटी कविता,  सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जीवन परिचय हिंदी में,  सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जीवन परिचय इन हिंदी,  सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता भिक्षुक,  सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जीवनी,  अनमोल वचन संग्रह,  अनमोल वचन 2020  छोटे अनमोल वचन,  अनमोल वचन अनमोल वचन,  अनमोल वचन शायरी,  अनमोल वचन वीडियो,  अनमोल वचन फोटो,  अच्छे अच्छे अनमोल वचन,  अनमोल वचन और सूक्तियां,  बेहतरीन अनमोल वचन,  छोटे छोटे अनमोल वचन,  अनमोल वचन संग्रह 1,
Suryakant Tripathi Nirala

हिंदी के महाकवि Suryakant Tripathi Nirala की निर्धनता, दुखों और फक्कड़ स्वभाव के बारे में बहुत सी घटनाएं सुनी जाती है। उन्हें जानने वाले बताते हैं, कि इसके बावजूद उन्हें रूपए-पैसे का लालच छू भी नहीं पाया था। अक्सर ऐसा भी होता था, कि उनके घर में दो वक्त की रोटी के लिए अनाज नहीं जुड़ता था, या परिवार के सदस्यों के इलाज के लिए धन उपलब्ध नहीं होता था। फिर भी वे विचलित नहीं होते थे।

एक बार वे ऐसी ही स्थितियों से गुजर रहे थे कि, एक साहित्यिक संस्था की ओर से उन्हें 2100 रुपए का पुरस्कार मिला। पुरस्कार समारोह में ही 'Suryakant Tripathi Nirala ' जी को पता चला कि उस समय की प्रसिद्ध साहित्यिक पत्रिका 'सरस्वती' घाटे में चल रही है।

संयोग से सरस्वती के संपादक उस सम्मेलन में आए हुए थे। पुरस्कार पाते ही "Suryakant Tripathi Nirala " जी ने वह रकम "सरस्वती" के संपादक को भेंट कर दी और कहा, "सरस्वती बंद नहीं होनी चाहिए।"


अनमोल वचन



तुलसी पंछिन के पिये, घटे न सरिता -नीर ।
दान दिए धन ना घटै, जो सहाय रघुवीर ।।


तुलसीदास के अनमोल वचन

जो जल बाढ़ै नाव में, घर में बाढ़ै दाम ।
दोऊ हाथ उलीचिये, यही सयानो काम ।।


कबीरदास के Anmol Vachan


 इन्हें भी पढ़ें

Post a Comment

0 Comments