Prerak Prasang Book

Motivational Story in hindi | कफ्फू चौहान | Prerak Prasang

कफ्फू  चौहान "प्रेरक प्रसंग"
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कफ्फू चौहान

सन 1500 ई. की बात है | अजयपाल गढ़वाल के राजा थे | और उप्पू गढ़ के गढ़पति थे कफ्फू चौहान । अजय पाल ने कफ्फू चौहान को संदेश भेजा,  " गढ़वाल के अधिकांश गढ़पतियों ने मेरी अधीनता स्वीकार कर ली है । आप भी मेरी अधीनता स्वीकार करें या युद्ध के लिए तैयार रहें ।" कफ्फू चौहान ने अजयपाल की अधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया । अजय पाल ने उप्पू गढ़ पर आक्रमण कर दिया । घोर युद्ध हुआ । कफ्फू चौहान की हार हुई। अजयपाल की सेना ने कफ्फू चौहान को बंदी बना लिया । उसे अजयपाल के सामने पेश किया गया | अजयपाल कफ्फू चौहान की वीरता से बड़ा प्रभावित था । उसने कफ्फू चौहान की वीरता की प्रशंसा करते हुए कहा,  " आप गढ़वाल राज्य की अधीनता स्वीकार कर लो। आपको पूर्ण सम्मान दिया जाएगा।"

कफ्फू निर्भीकता से बोला, " मुझे उप्पू गढ़ की स्वाधीनता खो कर सम्मान पाना स्वीकार नहीं ।" अजय पाल को क्रोध आ गया । उसने अपने सैनिकों को आदेश दिया,  "इसका सिर इस तरह काटो कि वह मेरे पैरों में गिरे ।" कफ्फू चौहान ने चुपचाप एक मुट्ठी बालू अपने मुंह में भर ली । जैसे ही तलवार कफ्फू की गर्दन पर पड़ी, उसने अपना सिर पीछे को झटक लिया । कफ्फू चौहान का सिर पीछे की ओर जा गिरा और उसके मुंह की बालू अजयपाल के चेहरे पर जा गिरी ।

अजय पाल उस वीर के स्वाभिमान को देखकर चकित रह गया । उसने पूरे सैनिक सम्मान के साथ कफ्फू चौहान का अंतिम संस्कार किया ।

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